मेरी सेक्स स्टोरी : आपकी याद आती है


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सभी पाठकों को मेरा नमस्कार.. मैं यूपी का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 25 साल.. कद 5 फुट 6 इन्च है। यह meri sex story है.. और एकदम सत्य घटना है।

मेरे घर के पास इंटर कालेज है। मैं वहाँ पढ़ाई कर रहा था। उन दिनों एक लड़की सरिता पढ़ने आई। वो उसी कालेज के प्रधानाध्यापक की लड़की थी। वो बहुत खूबसूरत थी। उसका चेहरा एकदम गोल.. काली-काली आँखें.. गुलाबी होंठ.. कमर तक लंबे बाल और सीने पर संतरे जैसे दो चूचे बहुत ही सेक्सी लुक देते थे।

जब वो चलती थी तो उसके कूल्हे काफी आकर्षक लगते थे.. मतलब यह कि उसके मुकाबले में मैंने उस दिन तक तो कोई लड़की नहीं देखी थी।

वो एकदम पटाखा माल थी। उसे देखकर सारे लड़कों की नीयत ख़राब हो जाती थी। मैं पसंद तो उसे बहुत करता था.. शायद वो भी मुझे पसंद करती थी लेकिन मुझे अपने दिल की बात कहने में दो साल लग गए। पर इन दो सालों में हमारा एक-दूसरे के बिना जीना मुश्किल हो गया.. मगर दिल की होंठों तक ना आ सकी।

खैर.. प्यार हुआ.. तो इजहार तो होना ही था। हम दोनों की बातें होने लगीं। एक दिन मैंने उसकी सहेली.. जो मेरे दोस्त की गर्लफ्रेंड थी.. से सरिता से मिलवाने की रिक्वेस्ट की.. तो वो तैयार हो गई।

बाद में एक दिन मेरे दोस्त ने फोन करके मुझे अपने घर बुलाया। मैं उसके घर पहुँचा ही था कि मेरी ख़ुशी का ठिकाना ना रहा। दोनों कमरे की ओर ही आ रही थीं। उनके अन्दर आने के बाद दरवाजा बंद किया। सरिता जैसे ही कमरे में आई.. ‘आई लव यू’ बोलकर मेरे गले लग गई।

मैं तो मानो जन्नत की सैर करने लगा। फिर एक प्यार भरी किस उसके गालों पर करने के बाद जैसे ही अपने होंठ उसके होंठों पर रखे.. उसका शरीर थरथरा गया। शायद पहली बार की वजह से ऐसा हुआ था।

उसके हाथ मेरी पीठ पर कसने लगे.. हम दोनों की जीभ से जीभ लिपटने लगी… दोनों एक-दूसरे का मुँह का रस पीने लगे। मैं उसके गोल-गोल चूतड़ों पर हाथ फिराने लगा। उसके बीच की दरार पर हाथ फिराते ही मेरा लण्ड पैन्ट के अन्दर अपने पूरे आकार में आ गया। उसके मम्मे भी कड़े हो गए.. निप्पल सीने में चुभने लगे।

मैंने अपना हाथ उसके चूचों पर रखा और दबाने लगा और फिर उसे बेड पर लिटा दिया।

मैं अपने हाथ उसकी कमर से ऊपर फिराने लगा.. उसके हाथ मेरी पीठ कमर पर फिसल रहे थे। उसकी आँखों में उत्तेजना का खुमार साफ दिखाई दे रहा था।

फिर मैंने जैसे ही अपना हाथ उसकी चूत पर रखा.. वो मेरा हाथ झिटक कर दूर जा बैठी।

मैंने पूछा- क्या हुआ?
तो कहने लगी- मैं शादी से पहले ये नहीं कर सकती।

मुझे लगा कि अब मैं अपना लण्ड हिलाता ही रह जाऊँगा.. ये मुझे चोदने नहीं देगी। मुझे उस पर बहुत गुस्सा आ रहा था।

मैंने कहा- अगर तुमको मुझ पर विश्वास नहीं है.. तो शादी के बाद ही मुझसे मिलना और बात भी उसी समय करना। यह कहकर मैं दूसरे कमरे जाकर लेट गया।
लगभग दस मिनट बाद वो मेरे पास आई ‘सॉरी’ बोलकर मेरे सीने से लग गई और मेरे होंठों पर किस करने लगी।

अपने दोनों पैर मेरी कमर के इधर-उधर करके मेरे ऊपर लेट गई।

अब उसकी चूत मेरे लण्ड के सुपाड़े पर रगड़ रही थी। मेरी उत्तेजना थोड़ी कम पड़ गई थी.. लेकिन उसके इस तरह लेटने और प्यार करने की वजह से मेरे लण्ड में फिर तूफान आ गया।

सरिता भी पहले से कहीं ज्यादा उत्तेजित होने लगी तथा अपनी चूत को मेरे लण्ड पर दबा रही थी।

मैंने उसे बिस्तर पर आराम से बिठाया और उसका सूट उतारने लगा। सूट उतारने में बड़ी परेशानी हुई.. क्योंकि उसे शर्म आ रही थी। उसने ब्रा में कैद चूचे अपने हाथों से छिपा लिए.. मैंने उसके पीछे जाकर ब्रा का हुक खोल दिया और उसके संगमरमरी बदन से अलग कर दिया। लेकिन मुझे उसके चूचों के दर्शन अभी तक नहीं हुए थे।

मैंने उसको खड़ा करके उसके होंठों से अपने होंठ मिलाकर उसके मम्मे अपने हथेली में भर लिए और धीरे-धीरे सहलाने लगा। एक हाथ नीचे लाकर सलवार का बंधन खींच दिया.. जिससे वह खुलकर फर्श पर जा गिरी। सरिता अब सिर्फ पैंटी में खड़ी थी और शर्म से दोहरी हो रही थी। ज्यादा शर्म के कारण मुझे भी अच्छा नहीं लग रहा था।

फिर मैंने उसे बेड पर लिटाया और उसके एक मम्मे को मुँह में भर लिया.. उसके मम्मे कठोर हो चुके थे.. निप्पल तन गए थे।

मैं निप्पल पर अपनी जीभ फिराने लगा। मैंने अपना हाथ उसकी चूत पर रख दिया और पैंटी के ऊपर से सहलाने लगा। उसकी चूत गीली हो चुकी थी। उसके हाथ मेरे शर्ट की बटनों को खोलकर शर्ट को मेरे बदन से अलग कर चुके थे। मैंने अपनी पैंट और इनर को निकाल कर अलग कर दिया। अब हम दोनों के जिस्मों पर केवल एक-एक कपड़ा ही बचा था।

मैंने उसकी पैंटी धीरे से निकाल दी.. उसकी चूत का उपरी हिस्सा दिखाई पड़ रहा था.. उस पर बहुत कम रोंए थे।

मैंने अपनी अंडरवियर उतार दी और उसका हाथ अपने लण्ड पर रख दिया। मैं उसकी चूत सहलाने लगा और उसके मम्मे दबाने लगा।

अब उसके मुँह से गरम आवाजें निकलने लगी थीं.. वो एकदम गरम हो गई थी। उसका हाथ मेरे लण्ड को ऊपर से नीचे सहलाने लगा था।

मैं उसकी चूत को किस करना चाहता था तो मैंने उसके पैरों की ओर जाकर उसके पैरों को फैला दिया।
हाय.. क्या नजारा था उसकी गुलाबी चूत पर केवल 2 इंच का चीरा दिख रहा था। चूत का छेद भी बहुत पतला दिखाई पड़ रहा था। मैंने उसकी चूत से अपने होंठ भिड़ा दिए.. वो एकदम से कांप गई.. और उसके मुँह से सीत्कार निकल गई।

फिर मैं उठकर उसके ऊपर 69 की पोजीशन में लेट गया.. मेरा लण्ड उसके होंठों पर रगड़ रहा था.. मगर वो कोई हरकत नहीं कर रही थी।

मैं उसकी चूत को जोर-जोर से चूसने लगा.. वो लगातार मचल रही थी। उसके मुँह से आहें निकल रही थीं ‘आह.. सीईई.. आह.. उम्म्म.. बस करो प्लीज..’

वो एकदम से गरम ही गई और मेरे लण्ड को मुँह में भर कर चूसने लगी। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मेरा लण्ड पूरी तरह से कड़क होकर लम्बा और मोटा हो गया था। अब मेरा लवड़ा उसकी चूत फाड़ने को पूरी तरह से तैयार हो गया था।

वो इतनी गरम हो चुकी थी कि मेरे लण्ड को खा जाने की कोशिश कर रही थी। उसकी चूत बहुत बुरी तरह फड़क रही थी। उसने मुझे अपने ऊपर से नीचे किया और मेरे कमर के दोनों तरफ पैर करके बैठ गई।

उसने मेरे लण्ड को अपने हाथों से पकड़ कर चूत के छेद पर टिकाया और दबाने लगी.. मगर दर्द की वजह से रुक जाती।
वो परेशान होकर मुझसे कहने लगी- जान अन्दर डालो ना.. क्यों तड़पा रहे हो।

मैंने उसे नीचे लिटाया.. उसके पैर फैलाए.. चूत का नजारा लिया। चूत एकदम लाल हो गई थी और बुरी तरह फड़क रही थी, उसकी दोनों टाँगें अपने कन्धों पर रखी.. कमर के नीचे तकिया लगाया। उसकी चूत कामरस से पूरी तरह चिकनी हो चुकी थी।

अपने लण्ड पर मैंने ढेर सारा थूक लगाया और चूत पर टिका कर धक्का मारा.. मगर बेकार।
दर्द के कारण सरिता ने कमर हिला दी और लण्ड फिसल गया। इसी बीच मुझे अहसास हुआ कि चूत बहुत ज्यादा टाईट है और इसी कारण अप्रत्याशित दर्द की संभावना भी बढ़ गई थी।

मैं उठा और दूसरे कमरे से सरसों का तेल ले आया। मैंने ढेर सारा तेल उसकी चूत में लगाया और चूत के छेद में भरपूर तेल डाल कर छोटी उंगली अन्दर घुसेड़ दी.. वो दर्द से तिलमिला गई।

फिर मैंने अपने लण्ड के सुपारे से खाल को नीचे किया और पूरे लण्ड को तेल से तर कर दिया.. तेल बहकर मेरे टट्टों पर आने लगा।

अब मैंने सरिता की कमर के नीचे तकिया लगाकर लण्ड को चूत के छेद पर सैट कर दिया और सरिता से कहा- लौड़े को हाथ से पकड़े रहो.. ताकि फिसल ना जाए।

फिर मैंने सरिता के पैरों को दबाकर पेट से मिला दिया.. जिससे उसकी चूत और उभर आई। साथ ही मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से बंद कर दिया और पूरी ताकत से एक धक्का मारा.. लण्ड का सुपारा चिकनाई के कारण ‘फक्क..’ की आवाज के साथ चूत के छेद में फंस गया। वो अपने हाथ और सर पटकने लगी.. जिससे उसके होंठ मेरे होंठों से अलग हो गए.. और उसकी बहुत तेज चीख निकली।

‘आ..आ आ..ईई.. माँआ.. म्म्म्म्मर गगई.. ईई.. ओ मम्मी.. मुझे छोड़ दो मुझे नहीं करवाना.. मैं मर जाऊँगी.. प्लीज आईई.. आआ..ह.. सीईई.. बहुत दर्द हो रहा है.. निकाल लो..’
उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे.. चेहरे से पीड़ा साफ़ झलक रही थी। पूरा बदन अकड़ा हुआ था।

मैं उसको होंठों को चूसने लगा.. उसके मम्मे दबाने लगा।

कुछ समय बाद जब नार्मल हुई.. तो मैंने फिर से जोर का एक झटका मार दिया। इस बार लण्ड और थोड़ा अन्दर घुस गया। वो चिल्ला रही थी मगर मैंने उसके दर्द की चिंता के बिना एक और तेज धक्का मार दिया.. मेरा लण्ड उसकी चूत को खोलता हुआ अन्दर घुस गया।

सरिता फिर दर्द से तड़फने लगी.. चूंकि मैंने उसके होंठों को अपने होंठों में दबा रखा था.. इसीलिए उसकी चीख गले में ही दबकर रह गई और वो ‘गों..गों..’ की आवाज कर रही थी। उसका सारा शरीर पसीने में भीग गया था।

उसकी चूत की सील फट गई थी और उसकी गांड के नीचे लगा हुआ तकिया खून से भीग रहा था।

मैं अपनी कमर को धीरे-धीरे हरकत देने की कोशिश कर रहा था.. मगर लण्ड चूत में बुरी तरह फंसा हुआ था। मेरी जरा सी हरकत से उसका दर्द बढ़ जाता था और वो तड़प जाती।

मैं कुछ मिनट बिना हिले-डुले ऊपर लेटा रहा.. उसके मम्मे सहलाता रहा और होंठों को चूसता रहा। जब सरिता कुछ सामान्य हुई तब मैंने धीरे से अपना लण्ड 2 इंच बाहर खींचा और पूरी ताकत के साथ जोर का धक्का मारा।

अबकी बार लण्ड उसकी चूत को चीरता हुआ बहुत अन्दर तक घुस गया। वो बहुत तेजी से उछल पड़ी। मैंने दर्द की चिंता न करते हुए एक और धक्का पूरी ताकत से मारा.. मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत में घुस गया।

इसी के साथ उसके मुँह से जोर की चीख निकली- आआ.. उईई.. मर गईई.. मम्मी.. रे.. उईईई.. इसस्स्स.. छोड़ दो मुझे प्लीज्ज..
यकीनन उसे बहुत तेज पीड़ा हो रही थी क्योंकि उसकी चूत बहुत टाईट थी। मुझे अपने लण्ड में जलन महसूस हो रही थी।

मैं करीब 5 मिनट ऎसे ही उसके ऊपर लेटा रहा.. उसके मम्मे सहलाता रहा। दर्द ज्यादा होने के कारण मैंने अपना लण्ड पीछे खींच लिया.. जिससे उसे कुछ आराम आया।

अब मैं अपनी कमर को धीरे-धीरे हिलाने लगा.. जब लण्ड को बाहर खींचता.. वो भी अपनी कमर ऊपर को उठाने लगती। उसकी चूत का छल्ला बहुत बुरी तरह कसा हुआ था.. मगर तेल लगा होने की वजह से लण्ड को बाहर खींचने और अन्दर घुसाने में ज्यादा परेशानी नहीं हो रही थी।

इसी तरह कई बार अन्दर-बाहर करने की वजह से उसके दर्द का अहसास कम हो गया और वो भी अपनी कमर को ऊपर की ओर उचकाने लगी थी।

अब मैंने भी धक्कों की स्पीड बढ़ा दी.. जिससे उसे भी अब मज़ा आने लगा था। वो अपनी कमर को उठा-उठाकर मेरा साथ दे रही थी। उसके मुँह से मादक ध्वनियाँ निकल रही थीं।

‘आह्ह्ह.. ओई ईस्स्स्स.. आह.. तुमने तो मुझे मार ही डाला.. जान और तेज चोदो और तेज.. जब मेरी चूत फाड़ ही डाली है.. तो सोच क्या रहे हो.. घुसा दो अपना पूरा लण्ड.. और फाड़ दो.. मेरी चूत की धज्जियाँ उड़ा दो.. आह्ह..’

मैंने उसकी कमर पकड़ कर जोर की ठोकर मारी तो मेरा पूरा लण्ड अन्दर उसकी बच्चेदानी से टकराया।
वो उछल पड़ी- आआआईईईई.. मम्मी मर्र गईई..

मैं लण्ड पूरा बाहर निकालता.. और जड़ तक घुसा देता। वो भी मेरे हर धक्के का स्वागत कमर उछाल कर कर रही थी। मेरे हर धक्के पर उसके मुँह से निकलती मादक आवाजें मेरे जोश को दोगुना कर रही थीं और मेरी रफ़्तार में तेजी आ रही थी।

अब उसकी चुदास भरी आवाजें भी बहुत बढ़ गई थीं.. उसके हाथ मेरी पीठ पर कसने लगे थे। वो एकदम से मुझसे चिपक गई और झड़ने लगी। ‘आआआह्ह्ह्ह.. जाआन्न.. मैं आआ.. ईई..’ कहते हुए वो झड़ने लगी.. पर मैं अभी नहीं हुआ था।

चुदाई करते हुए काफी देर हो गई थी.. सरिता की कमर फिर से चलने लगी थी.. यानि उसे आनन्द आने लगा था।

लगभग 15-20 धक्कों के बाद मेरे लण्ड में सुरसुराहट होने लगी। मैं उसके मम्मों को मुँह में भर कर चूसने लगा।

अब मैं झड़ने को था.. उसी वक़्त सरिता की चूत सिकुड़ने लगी.. मैंने लण्ड को जोर के धक्के से चूत में उतार दिया। मेरे लण्ड ने पिचकारी छोड़ दी। तभी उसने मुझे कसकर भींचा और मैंने उसे भींच लिया। हम दोनों साथ-साथ झड़ने लगे और उसकी चूत हम दोनों के रस से भर गई।

मैंने लण्ड को चूत से बाहर निकाला उसकी चूत से ढेर सारा खून निकलने लगा.. चूत फूलकर कुप्पा हो गई थी। हम दोनों ने एक-दूसरे साफ किया और एक बार फिर जमकर चुदाई की।

अब वो घर जाने की हालत में नहीं थी उससे चला नहीं जा रहा था.. मैंने पेनकिलर देकर थोड़ी देर आराम करने के बाद उसको घर भेज दिया।

अब तो हमारी चुदाई का सिलसिला चल निकला.. चार सालों तक हम मिलते रहे। मगर अब वो मुझसे अपने माँ-बाप की ख़ुशी के लिए दूर हो गई है।

‘हमें आपकी बहुत याद आती है।’

दोस्तो, आपको meri sex story कैसी लगी.. मेल ज़रूर करना.. ताकि मैं अपने साथ घटी घटनाओं को कहानियों के रूप में पिरोकर आप तक पहुँचाता रहूँ।
[email protected]
आपकी मेल्स का इन्तजार रहेगा।

Written by

akash

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